साइफ़न
साइफ़न (या वैक्यूम पॉट) किसी छोटे-से विज्ञान प्रयोग जैसा दिखता है ⚗️। नीचे के काँच के गोले को गरम करने पर पानी ऊपर के बर्तन में चढ़ जाता है, जहाँ उसकी मुलाक़ात कॉफ़ी से होती है। आँच हटाने पर ठंडा होता निचला गोला बनी हुई कॉफ़ी को फ़िल्टर से वापस नीचे खींच लेता है। इसे देखना जादू जैसा लगता है, और इससे कमाल का साफ़, मीठा, ख़ुशबूदार कप बनता है। थोड़ी रस्म, ढेर सारा मज़ा।
ग्राइंड: मध्यम, मोटी रेत जैसा
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शब्द जो आप सुनेंगे
- निचला गोला
- नीचे का गोल काँच का हिस्सा, जिसमें पानी रहता है और बाद में तैयार कॉफ़ी आती है।
- ऊपरी बर्तन
- काँच की नली वाला ऊपर का हिस्सा। पानी इसमें चढ़ता है और कॉफ़ी यहीं बनती है।
- फ़िल्टर
- कपड़े, कागज़ या धातु की गोल डिस्क जो ऊपरी बर्तन के तले में बैठती है और पिसी कॉफ़ी को रोकती है।
- ड्रॉडाउन
- जब आँच हटाई जाती है और कॉफ़ी वापस निचले गोले में खिंच जाती है। इसमें लगभग 30–60 सेकंड लगने चाहिए।
- वैक्यूम
- निचला गोला ठंडा होने पर अंदर की भाप पानी बन जाती है और दबाव घट जाता है, जो कॉफ़ी को वापस नीचे खींच लेता है।
- अनुपात
- पानी का वज़न भाग कॉफ़ी का वज़न। 1:15 का मतलब है 20 g कॉफ़ी पर 300 g पानी।
- एक्सट्रैक्शन
- पानी पिसी कॉफ़ी से कितना स्वाद खींचता है। कम एक्सट्रैक्शन: खट्टा और पतला; ज़्यादा एक्सट्रैक्शन: कड़वा और रूखा।